छठ पूजा एक बहुत ही पवित्र और अनुशासित पर्व है। इस पूजा की सबसे खास बात यह है कि इसे कोई भी कर सकता है। इसमें न जाति का फर्क होता है, न धर्म का, और न ही अमीरी-गरीबी का।
इस पर्व में एक और खास बात देखने को मिलती है कि लोग एक-दूसरे की मदद भी करते हैं। अगर किसी को कुछ जरूरत हो, तो लोग बिना सोचे मदद कर देते हैं, चाहे वो गेहूं हो, नारियल, गागर नींबू, गन्ना या कोई और चीज।
यह पर्व खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल में बड़े श्रद्धा से मनाया जाता है।
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को धन्यवाद देने के लिए की जाती है, ताकि वे हमें और हमारे परिवार को स्वस्थ और खुश रखें।
चार दिनों का पर्व
छठ पूजा चार दिनों तक चलती है, और हर दिन का अपना महत्व होता है।
1. नहाय-खाय
पहले दिन लोग सुबह स्नान करते हैं और घर की अच्छी तरह सफाई करते हैं। इस दिन सादा और शुद्ध खाना बनाया जाता है, जिसमें लौकी का खास महत्व होता है। पहले भगवान को भोग लगाया जाता है, फिर वही भोजन प्रसाद के रूप में सब खाते हैं।
2. खरना
दूसरे दिन व्रत रखने वाले पूरे दिन उपवास करते हैं। शाम को वे गुड़ की खीर और रोटी बनाते हैं।
खीर को रोटी के साथ रखकर उसमें केला, तुलसी के पत्ते और फूल के साथ भगवान को अर्पित किया जाता है।
पूजा के बाद यह प्रसाद सबको बांटा जाता है, और व्रती भी यही प्रसाद खाकर अपना उपवास पूरा करते हैं। इसके बाद वे निर्जला व्रत रखते हैं।
3. संध्या अर्घ्य
तीसरे दिन घर में ठेकुआ और बाकी प्रसाद बनाए जाते हैं। फिर बांस के सूप को सजाया जाता है।
सूप में ठेकुआ, केला, सेब, नारंगी, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा, सुथनी, गागर नींबू, अदरक, हल्दी के साथ-साथ अक्षत, पान का पत्ता, अकुरी, फूल, बंधी और अरघ-पट भी रखा जाता है।
सूप सजाने के बाद ऐपन (चावल और हल्दी से बना पेस्ट) से सूप और उसमें रखी चीजों पर हल्का-हल्का टीका लगाया जाता है।
उसी ऐपन से साफ जगह पर सूप के अनुसार स्वस्तिक बनाए जाते हैं।
शाम को सभी लोग सूप को सिर पर लेकर नंगे पैर घाट जाते हैं।
वहां व्रती पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
इसके बाद सूप को घर लाया जाता है और हर सूप को एक-एक स्वस्तिक पर रखा जाता है। फिर धूप जलाकर हवन किया जाता है।
इसके बाद रात भर दीपक और अगरबत्ती जलते रहते हैं।
4. उषा अर्घ्य
चौथे दिन सुबह लगभग 3 बजे से ही लोग उठकर तैयारी शुरू कर देते हैं। स्नान करने के बाद सूप में रखे पुराने ठेकुआ को बदलकर नए ठेकुआ रखे जाते हैं।
फिर सभी लोग सूप को सिर पर लेकर घाट जाते हैं।
वहां व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद व्रती सभी लोगों को प्रसाद देते हैं और आशीर्वाद देते हैं। लोग उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
छठ पूजा हमें सादगी, साफ-सफाई और आपसी सहयोग सिखाती है। इसमें दिखावा नहीं होता, बस सच्ची श्रद्धा होती है। यही वजह है कि यह पर्व लोगों के दिल के बहुत करीब होता है।